
बैठे -बैठे फिर लबो में हंसी च गयी ,
आज फिर पुरानी बाते याद आ गयी,
बैठी थी पास मेरी माँ और,वो दीवानी आ गयी,.................
धड़कने दिल से जुदा हो गयी , और आखो में अँधेरा छा गया ,
मै कुछ बोल पाता,इससे पहले , यहाँ कहा बैठे हो का फरमान आ गया ,
माँ ने देखा मेरी ओर.और ,उसे सारा माजरा समझ आ गया ,
बनी बनायीं इज्जत लुटने का वक़्त आ गया ...................
मैंने कहा -मेरी माँ हे ,तो तड़ाक से आंटी जी नमस्ते का जवाब आ गया ,
में कब से कर रही थी इंतजार ओर तुम यहाँ बैठे हो बेकार ,
माँ के सामने ,मै भी थोडा सरमा गया ,
मैंने कहा थोडा काम था, एसलिये यहाँ आ गया ,
मुझे क्या पता था ,ये चुहिया भी एक दिन शेरिनी बन जाएगी ,
कर निरुत्तर मुझे , समक्ष मेरी माँ के , यू बेज्जत करवाएगी ..................
माँ ऐ मेरी दोस्त हे कह कर मैंने उसका परिचय करवाया ,
माँ,दो कप चाय बनाना ,कह मैंने भी धनुष उठाया ,
एकांत मिलते ही मैंने भी तीर चलाया , कहा- यार मेसेज किया था पर डिलीवर नहीं हो पाया ....
क्या दो मिनिट चोच बंद नहीं रख सकती थी, तुमने तो मुझे आज मरवाया ,
अरे पगली ये बात यहाँ नहीं रुकेगी ,हाई कमान तक जाएगी ,
रात ना सही पर सुबह तक पेशी जरुर हो जाएगी ,
तेरी मेरी दोस्ती की चर्चा अब आम हो जाएगी ,
मेरे फ़ोन की हर घंटी माँ को तेरी याद दिलाएगी .....................
सोरी यार अब मै कभी नहीं आउंगी, इस बार फश गए ,दुबारा नहीं फसाऊँगी,
मैंने कहा ,कोई बात नहीं ,अब तो तुम लाइसेंस धारक हो ,
अक्सर आती जाती रहना , माँ से ही नहीं, पापा से भी मिलती रहना,
इस घटना से मैंने सबक पाया ,दुबारा किसी महिला मित्र को अपने घर का पता नहीं बताया......
बैठे -बैठे फिर लबो में हंसी छा गई ,
आज फिर पुरानी बाते याद आ गई,
बैठी थी पास मेरी माँ और वो दीवानी आ गयी , .........................................
