शनिवार, 18 सितंबर 2010

आदमी ,कुत्ता और बॉय-फ्रेंड ...............


एक बार गुरु जी ने कुत्ते का पर्य्यावाची पूंछा -





मैंने कहा - स्वान , कुकुर और बॉय-फ्रेंड .......




सारी क्लास मुस्कुराई और गुरु जी को गुस्सा आयी .........




सच बोलने का हर्जाना पाया,




बिना एक्साम दिए ही इन्टरनल और एक्स्टेरनल में जीरो पाया ............




सर को कितना समझाया , कुत्ते को कितना भी मारों




रोटी देख तुरंत दौरा आता है .................




लड़की कितना भी दुत्कारे , पर एक मुस्कराहट से हर जख्म भर जाता है .........




दिए कितने ही स्पस्टीकरण विथ एक्साम्पल ,




तब जाकर उन्हें मेरा दर्द समझ में आया ,




कर याद अपने दिनों की , बड़ी मुश्किल से गुरु जी ने मुझे पास करवाया ...........




दर्द सबका समांन है , बस वरिएटी का अभिमान ,




कोई पामेलियन ,कोई देशी या कोई बुलडाग है ...............




ना जाने कैसे बात लीक हो गई,




क्लास रूम की दीवारों से निकल गर्ल्स होस्टल पहुच गयी ,..............




अब तो बात और भी अनियंत्रित ही गयी ,




देवी जी की अंतरात्मा जो जाग गयी .............




टूटे मन ने वर्त्तमान से अतीत में पहुचाया ,




आया था तो ७५% वाला था ,अब तो ५७%पर ही stik हो गया .............




जब आया था तो बड़ा परेशान था ,




क्लास को अनुपात जो असमान था.........



इंट्रा डिपार्टमेंट चांस जीरो जीरो देखकर, एक्स्ट्रा डिपार्टमेंट का ख्याल आया


तब जा कर कही बी टेक में मिशन सफल हो पाया ,..................




उसने टी-शर्ट , शू ,पतलून क्या -क्या उधार नहीं मंगवाया ,




डिनर में हर बार उसने मुझसे ही फास्ट करवाया ..............




हेरान हु परेशान हु, पर गर्ल फ्रेंड का गुलाम हू ..........................




अब तो गली के कुत्ते भी नहीं भोकते है देखकर ,




कहते है , यार तुने तो हमें भी बे-इज्जत करवाया ..............




तभी थ्रो मेसेज कैंटीन में मिलने को फरमान आया ,




ना चाहते हुए भी मैंने उस तरफ कदम बढाया ............




उसकी एक मुस्कुराहट ने फिर मुझे केच आउट करवाया ...................




ये गर्लफ्रेंड एक बीमारी है ना हो तो अफ़सोस ,हो जाए तो महामारी है ,




अभी समझ गए तो अच्छा है , वर्ना खुद ही समझ जायोगे ,




आज में तुम्हे सुना रहा हु , कल तुम किसी और को सुनायोगे ..................



















भाई अब गली के कुत्तो को मरने से पहले सोच लेना , अपने ही भाई है , थोडा रहम खा लेना, मेरे यारो .....................




शनिवार, 31 जुलाई 2010

मेरी प्रेमिका - बारिश................

ये बारिश भी बड़ी बेवफा हें ,वक़्त-बेवक्त आ जाती हें,


चाहते न चाहते सर से पाँव तक भिगो जाती हें ,

घूमते बादल देख दिल भीगना चाहता हें ,

पहली बूंद दिल में सिहरन जगा जाती हें ,

पर हो जय तो बेबस और लाचार बना जाती हें ,

मचलना और सिहरना छोर,तेयोरेया चढ़ा जाती हें,

ये बारिश प्रेमिका से आखिर कितना मेल खाती हें ,

रोड किनारे भरा पानी देख ,होठो में हंसी छा जाती हें ,

तेज रफ़्तार गाढ़ी देख पल में रुक्सत हो जाती हें ,

जब तक दूर हें अच्छी हें,पास आते ही सब कुछ बदल जाती हें ,

ये बारिश प्रेमिका से आखिर कितना मेल खाती हें

ये हमें भी भेगोती हें ,उसे भी भेगोती हें .........

पर कभी किसी की हो नहीं पाती हें ,

कभी जायदा कभी कम ,अलग-अलग अंदाज़ दिखाती हें ,

जब हम सर से पाव तक भीग जाती हें ,तो खुद बा खुद बंद हो जाती हें ,

ये पल में ही माहोल बदल जाती हें ,

हँसते को रुला और रोते को हंसा जाती हें ,

ये बारिश प्रेमिका से आखिर कितना मेल खाती हें,

जब चाहते हें तो कभी नहीं ,जब नहीं चाहते तो खुद-ब- खुद चली जाती हें ,

बेसरम हें,मगरूर हें ,पर क्या करे हमारी जरुरत हें ,

न मिले तो बैचेन,मिल जायं तो चैन लुट ले जाती हें ,

ये बारिश प्रेमिका से आखिर कितना मेल खाती हें,

इस बारिश से जरा संभल कर रहना ,

अज बच गे तो खुश मत हो,कल खुद ही भीगना चाहोगे,

क्यों की ये बारिश प्रेमिका से बहुत मेल खाती हें ................................................