शनिवार, 31 जुलाई 2010

मेरी प्रेमिका - बारिश................

ये बारिश भी बड़ी बेवफा हें ,वक़्त-बेवक्त आ जाती हें,


चाहते न चाहते सर से पाँव तक भिगो जाती हें ,

घूमते बादल देख दिल भीगना चाहता हें ,

पहली बूंद दिल में सिहरन जगा जाती हें ,

पर हो जय तो बेबस और लाचार बना जाती हें ,

मचलना और सिहरना छोर,तेयोरेया चढ़ा जाती हें,

ये बारिश प्रेमिका से आखिर कितना मेल खाती हें ,

रोड किनारे भरा पानी देख ,होठो में हंसी छा जाती हें ,

तेज रफ़्तार गाढ़ी देख पल में रुक्सत हो जाती हें ,

जब तक दूर हें अच्छी हें,पास आते ही सब कुछ बदल जाती हें ,

ये बारिश प्रेमिका से आखिर कितना मेल खाती हें

ये हमें भी भेगोती हें ,उसे भी भेगोती हें .........

पर कभी किसी की हो नहीं पाती हें ,

कभी जायदा कभी कम ,अलग-अलग अंदाज़ दिखाती हें ,

जब हम सर से पाव तक भीग जाती हें ,तो खुद बा खुद बंद हो जाती हें ,

ये पल में ही माहोल बदल जाती हें ,

हँसते को रुला और रोते को हंसा जाती हें ,

ये बारिश प्रेमिका से आखिर कितना मेल खाती हें,

जब चाहते हें तो कभी नहीं ,जब नहीं चाहते तो खुद-ब- खुद चली जाती हें ,

बेसरम हें,मगरूर हें ,पर क्या करे हमारी जरुरत हें ,

न मिले तो बैचेन,मिल जायं तो चैन लुट ले जाती हें ,

ये बारिश प्रेमिका से आखिर कितना मेल खाती हें,

इस बारिश से जरा संभल कर रहना ,

अज बच गे तो खुश मत हो,कल खुद ही भीगना चाहोगे,

क्यों की ये बारिश प्रेमिका से बहुत मेल खाती हें ................................................