ये बारिश भी बड़ी बेवफा हें ,वक़्त-बेवक्त आ जाती हें,
चाहते न चाहते सर से पाँव तक भिगो जाती हें ,
घूमते बादल देख दिल भीगना चाहता हें ,
पहली बूंद दिल में सिहरन जगा जाती हें ,
पर हो जय तो बेबस और लाचार बना जाती हें ,
मचलना और सिहरना छोर,तेयोरेया चढ़ा जाती हें,
ये बारिश प्रेमिका से आखिर कितना मेल खाती हें ,
रोड किनारे भरा पानी देख ,होठो में हंसी छा जाती हें ,
तेज रफ़्तार गाढ़ी देख पल में रुक्सत हो जाती हें ,
जब तक दूर हें अच्छी हें,पास आते ही सब कुछ बदल जाती हें ,
ये बारिश प्रेमिका से आखिर कितना मेल खाती हें
ये हमें भी भेगोती हें ,उसे भी भेगोती हें .........
पर कभी किसी की हो नहीं पाती हें ,
कभी जायदा कभी कम ,अलग-अलग अंदाज़ दिखाती हें ,
जब हम सर से पाव तक भीग जाती हें ,तो खुद बा खुद बंद हो जाती हें ,
ये पल में ही माहोल बदल जाती हें ,
हँसते को रुला और रोते को हंसा जाती हें ,
ये बारिश प्रेमिका से आखिर कितना मेल खाती हें,
जब चाहते हें तो कभी नहीं ,जब नहीं चाहते तो खुद-ब- खुद चली जाती हें ,
बेसरम हें,मगरूर हें ,पर क्या करे हमारी जरुरत हें ,
न मिले तो बैचेन,मिल जायं तो चैन लुट ले जाती हें ,
ये बारिश प्रेमिका से आखिर कितना मेल खाती हें,
इस बारिश से जरा संभल कर रहना ,
अज बच गे तो खुश मत हो,कल खुद ही भीगना चाहोगे,
क्यों की ये बारिश प्रेमिका से बहुत मेल खाती हें ................................................
